श्रीअरविंद प्रभु के सनातन अवतार हैं,
अगर हम उनकें साथ सतत संपर्क में रह सकें और आवश्यक कार्य कर सकें तो वे हमेशा हमारे साथ ही रहते हैं ;
और वह कार्य है – बस उनसे प्रेम करना।
संदर्भ – सफेद गुलाब
(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…
अवतार की सम्भावना पर विश्वास करने या न करने से प्रकट तथ्य पर कोई फ़र्क़…
यदि चैत्य पुरुष की प्रकृति जाग्रत हो जाए, अपने पीछे विद्यमान माताजी की चेतना और…
भागवत चेतना की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं। रूपांतर की भी विभिन्न अवस्थाएँ होती है। पहली…