अवनति में कोई अनोखी बात नहीं। योगाभ्यास शुरू करने से बहुत पहले मेरे बारे में भी यह प्रसिद्ध था कि इन्हें क्रोध विरले ही आता है। योग की एक विशेष अवस्था में वह मेरे अन्दर ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा और उसे निकालना में मुझे लंबा समय लगा। मैं एक बीती अवस्था की बात कर रहा था। अवचेतन से उसके उठने के विषय में मुझे पता नहीं, अवश्य ही वह विश्व-प्रकृति से आया होगा।
संदर्भ : श्रीअरविंद अपने विषय में
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…