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श्रीअरविंद और श्रीमाँ का संसार

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सत्य

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धर्म की गलती
290

धर्म की गलती

by श्री माँ 3 सप्ताह ago3 सप्ताह ago
सत्य का सबसे बुरा शत्रु
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सत्य का सबसे बुरा शत्रु

by श्री माँ 5 महीना ago5 महीना ago
  • 400
    श्रीमाँ का दर्शन
    श्री माँ के वचन

    भागवत कृपा पर श्रद्धा

    अगर व्यक्ति के अन्दर भागवत कृपा पर श्रद्धा है कि भागवत कृपा उस पर नजर रखे हुए है और चाहे कुछ क्यों न हो जाये,...

    श्री माँ
    by श्री माँ 5 महीना ago5 महीना ago
  • 630
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    वाणी और क्रिया में सच्चाई

    यह निश्चित है कि बिना किसी कष्ट के सत्य बोल सकने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम अपना व्यवहार सदा इस प्रकार...

    श्री माँ
    by श्री माँ 5 महीना ago5 महीना ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सत्य चेतना

    तुम जो कुछ भी करो वह उपयोगी हो उठता है यदि तुम उसमें सत्य चेतना की एक चिंगारी रख दो। तुम जो कार्य करते हो...

    श्री माँ
    by श्री माँ 7 महीना ago7 महीना ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    निष्कपटता

    किसी भी वस्तु को, कहीं भी, अपने सत्ता के सत्य को अस्वीकार न करने दो : यही निष्कपटता है । संदर्भ : माताजी के वचन...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 महीना ago8 महीना ago
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    श्रीअरविंद के पत्र
    श्रीअरविंद के वचन

    सत्य का यंत्र

    यदि तुम सत्य का यन्त्र बनना चाहो तो तुम्हें सदा सच ही बोलना होगा न कि झूठ। किन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि तुम्हें प्रत्येक...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 12 महीना ago12 महीना ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सामान्य प्रक्रिया

    श्रीअरविंद कहते हैं कि तुम्हे सबसे पहले अपने विषय में सचेतन होना चाहिये, फिर सोचना, और फिर कार्य करना चाहिये। सभी कार्यों से पहले सत्ता...

    श्री माँ
    by श्री माँ 12 महीना ago12 महीना ago
  • 200
    दर्शन संदेश १५ अगस्त २०१८ (२/४)
    श्री माँ के वचन

    अवतार

    सम्भ्वन की शाश्वतता में प्रत्येक अवतार एक अधिक पूर्ण सिद्धि का उद्घोषक और अग्रदूत होता है। फिर भी लोगों में हमेशा यह वृत्ति रहती है...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    अंतिम विजय की निश्चिति

    ‘सत्य’ मिथ्यात्व से बढ़ कर बलवान है। एक अमर ‘शक्ति’ जगत पर शासन करती है। उसके निश्चय हमेशा सफल होते हैं। उसके साथ हो जाओ...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 240
    श्रीअरविंद के पत्र
    श्रीअरविंद के वचन

    केवल सत्य

    तुम जिस चरित्र-दोष की बात कहते हो वह सर्वसामान्य है और मानव प्रकृति में प्रायः सर्वत्र पाया जाता है। असत्य बात कहने का अथवा कम- से-कम...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सत्य

    सत्य लकीर की तरह नहीं सर्वांगीण है, वह उत्तरोत्तर नहीं बल्कि समकालिक है। अतः उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता : उसे जीना...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago

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3 conditions of yoga auroville bases of yoga Mirra Alfassa Priti Das Gupta Sri Aurobindo Ashram sri aurobindo The Mother The Mother of Sri Aurobindo Ashram Pondicherry The Mother on Sports अध्यात्मिकता आंरोंविल आश्वासन कृपा निद्रा और स्वप्न पूर्ण योग प्रीति दास गुप्ता भागवत उपस्थिती भारत के लिये संदेश माताजी की झाकियां माताजी के वचन भाग-१ माताजी के वचन भाग-२ माताजी के वचन भाग - ३ माताजी के विषय में मातृवाणी योग योग समन्वय यौवन वयवहारिक ज्ञान साधकों के लिये विचार और सूत्र के प्रसंग में विश्वास व्यावहारिक ज्ञान साधकों के लिये शिक्षा के ऊपर श्रद्धा श्री अरविंद श्रीअरविंद श्रीअरविंद के वचन श्री अरविद श्री माँ श्री माँ अपने बारे में श्री माँ के बारें में श्री माँ के बारे में श्री माँ के संस्मरण श्री माँ शरीर के बारें में साधना साधना के संकेत श्री माँ द्वारा
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    ध्यान का अर्थ

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    आत्मसमर्पण

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    माताजी का घेरा

    माताजी का घेरा

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    अपना मार्ग खोजना

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  • क्या तुम युवा हो ?

    क्या तुम युवा हो ?

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    रोगी की श्रद्धा

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    प्रार्थना

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    मृत्यु की अनिवार्यता

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    चुनाव करना

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    सच्चा उत्तर

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    धर्म और योग में अंतर

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    व्यक्तिगत जीवन का प्रयोजन

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    सच्चे आध्यात्मिक जीवन का आरम्भ

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    खेल-प्रतियोगिताएं और प्रगति

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    धर्म की गलती

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