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श्रीमातृवाणी खण्ड-१७

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अनुशासन
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अनुशासन

by श्री माँ 4 महीना ago4 महीना ago
अहंकार
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अहंकार

by श्री माँ 6 महीना ago6 महीना ago
  • 270
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    अनुकम्पा

    अनुकम्पा क्षमा, दया का पर्याय है। यह बल और दयालुता से भरपूर दया है, ऐसी दया जो भूलों का परिमार्जन करती और क्षमा करती है,...

    श्री माँ
    by श्री माँ 8 महीना ago8 महीना ago
  • 560
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    कठिनाइयों का कारण

    मनुष्यों की जो अधिकतर कठिनाइयाँ होती हैं उनका कारण होता है, उनका अपनी क्रियाओं पर और दूसरों की क्रियाओं पर अपनी प्रतिक्रियाओं के नियंत्रण का...

    श्री माँ
    by श्री माँ 11 महीना ago11 महीना ago
  • 780
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    उदाहरण बनो

    हर एक पहले अपने लिए जिम्मेदार है; और अगर तुम औरों की सहायता करने की अभीप्सा रखते हो तो तुम जैसा होना चाहिये, उसका उदाहरण...

    श्री माँ
    by श्री माँ 11 महीना ago11 महीना ago
  • 360
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    अहंकार

    सभी परिस्थितियों में मुस्कुराना जानना भागवत प्रज्ञा की ओर जाने का सबसे शीघ्रगामी रास्ता है। अहंकार नाराज और बेचैन हो उठता है और यही अहंकार...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 430
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    आंतरिक परिवर्तन

    तुम्हें आंतरिक परिवर्तन के लिए निरंतर अभीप्सा करनी चाहिये, तुम्हारें अंदर यह इच्छा होनी चाहिये कि प्रकाश तुम्हारें अंधेरे भौतिक मन में आये, और तुम्हें...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 1600
    श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ का जापान का चित्र
    श्री माँ के वचन

    उदार हृदय

    उदार हृदय हमेशा पुराने दुर्व्यवहारों को भूल जाता है और दुबारा सामंजस्य लाने के लिए तैयार रहता है। आओ, हम सब उसको भूल जाएँ जो...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 460
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    सच्चा ध्यान

    सच्चा ध्यान क्या है ? वह भागवत उपस्थिती पर संकल्प के साथ सक्रिय रूप से की गयी एकाग्रता है और उस परम सद्वस्तु का सतत,...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ का संदेश भारत के विषय में
    श्री माँ के वचन

    देश के विषय में राय

    नीरवता ! नीरवता ! यह ऊर्जाएँ एकत्र करने का समय है, व्यर्थ और निरर्थक शब्दों में उन्हें इधर-उधर बिखेरने का नहीं। जो भी देश की...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 730
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्रीअरविंद के वचन

    भगवान का प्रेम

    झूठे गर्व से बच कर रहो – वह केवल विनाश की ओर ले जाता है ।  और भगवान के प्रेम को छोटा न समझो क्योंकि...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
  • 640
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्री माँ के वचन

    प्रकाश और आनंद में जीना

    कल मैंने लिखा था कि एक गंभीर स्थिरता है – लेकिन आज केवल एक गंभीर विक्षोभ है ! एक ही समय में सत्ता का एक...

    श्री माँ
    by श्री माँ 1 वर्ष ago1 वर्ष ago

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3 conditions of yoga auroville bases of yoga Mirra Alfassa Priti Das Gupta Sri Aurobindo Ashram sri aurobindo The Mother The Mother of Sri Aurobindo Ashram Pondicherry The Mother on Sports अध्यात्मिकता आंरोंविल आश्वासन कृपा निद्रा और स्वप्न पूर्ण योग प्रीति दास गुप्ता भागवत उपस्थिती भारत के लिये संदेश माताजी की झाकियां माताजी के वचन भाग-१ माताजी के वचन भाग-२ माताजी के वचन भाग - ३ माताजी के विषय में मातृवाणी योग योग समन्वय यौवन वयवहारिक ज्ञान साधकों के लिये विचार और सूत्र के प्रसंग में विश्वास व्यावहारिक ज्ञान साधकों के लिये शिक्षा के ऊपर श्रद्धा श्री अरविंद श्रीअरविंद श्रीअरविंद के वचन श्री अरविद श्री माँ श्री माँ अपने बारे में श्री माँ के बारें में श्री माँ के बारे में श्री माँ के संस्मरण श्री माँ शरीर के बारें में साधना साधना के संकेत श्री माँ द्वारा
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    ध्यान का अर्थ

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    आत्मसमर्पण

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    माताजी का घेरा

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    रोगी की श्रद्धा

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    प्रार्थना

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    मृत्यु की अनिवार्यता

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    व्यक्तिगत जीवन का प्रयोजन

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    खेल-प्रतियोगिताएं और प्रगति

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    धर्म की गलती

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