सुखी तथा सफल जीवन

श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ

सुखी तथा सफल जीवन के लिए सच्चाई, नम्रता, अध्यवसाय और प्रगति के लिए कभी न बुझने वाली प्यास जरूरी हैं । सबसे बढ़ कर यह कि तुम्हें विश्वास हो कि प्रगति कि सम्भावना असीम है । प्रगति यौवन है, तुम सौ वर्ष की उम्र में भी युवक हो सकते हो ।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

यौवन 

The Mother of Sri Aurobindo Ashram giving Balcony Darshan

यौवन इस बात पर निर्भर नहीं है कि हम कितने छोटे हैं, बल्कि इस पर कि हम मे विकसित होने की क्षमता और प्रगति करने की योग्यता कितनी हैं । विकसित होने का अर्थ हैं अपनी अंतर्निहित शक्तियां, अपनी क्षमताएं बढ़ाना; प्रगति करने का अर्थ है अबतक अधिकृत योग्यताओं को बिना रुके निरंतर पूर्णता की ओर ले जाना ।

सन्दर्भ : शिक्षा के उपर