लापरवाही

श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ

आश्रम में जब कपड़े धोने की व्यवस्था शुरू हुई कुछ धुले हुए कपड़े माताजी के देखने के लिए उनके पास लाये जाते थे । एक दिन धुले कपड़ों की बड़ी -सी गठरी उनके सामने लाकर रखी गयी । माताजी ने यूं ही गठरी के बीच से एक कपड़ा निकाला और उसपर एक भद्दा सा दाग लगा था । जो कपड़े दिखा रहा था वह काफी घबरा गया, परंतु यह बात थी बड़ी शिक्षाप्रद कि माताजी का हाथ सीधा उसी कपड़े पर गया जिसमें दाग था ।

संदर्भ : माताजी की झाँकियाँ 

एक नया धर्म

श्रीअरविंद और श्री माँ की समाधि

माताजी इस बात का विशेष ध्यान रखती थी कि समाधि की आध्यात्मिक पवित्रता सुरक्षित बनी रहें । वे किसी भी प्रकार के दिखावें या प्रदर्शन के विरुद्ध थी । वे नहीं चाहती थी वहाँ कोई विधि विधान शुरू हो । एक दिन लोगों को फूल उठाते और सजाते  देखकर उन्होनें कहा  “यह  लो एक नया धर्म पैदा हो रहा है ।”

संदर्भ : माताजी की झाकियाँ

आश्रम का स्थान

Balcony of Sri Aurobindo Ashram Pondicherry where The Mother used to give Darshan

किसीने माताजी से पूछा, ‘आपने आश्रम के लिये पांडिचेरी जैसा गरम स्थान क्यों चुना ? ‘ माताजी ने कहा, ‘श्रीअरविंद को समुद्र पसंद था, मुझे चुनना होता तो पहाड़ चुनती | ‘

सन्दर्भ : माताजी की झांकियां 

मूंगफली की दो थैलियां

The Mother of Sri Aurobindo Ashram

खेल के मैदान में माताजी बच्चों को मूंगफली की थैलियाँ दिया करती थीं । छोटे-बडें, सभी पंक्ति बनाकर दिव्य मुस्कान के साथ मूंगफली लेने के लिये खड़े होते थे । कुछ बच्चे ज़्यादा मूंगफली पाना चाहते थे । वे बार-बार पंक्ति में जाकर खड़े हो जाते थे । उन्होंने सोचा होगा, इतनी जल्दी में माताजी को कहाँ ख्याल रहेगा कि कौन पहले आ चुका हैं । लेकिन एक दिन उनमें से एक की आश्चर्य की हद न रही जब उसने देखा कि माताजी ने पहली ही बार उसे दो थैलियाँ पकड़ा दीं और वह भी विशेष मुस्कान के साथ ।

सन्दर्भ : माताजी की झांकियां