भारत के विषय में

अखंड भारत का नक्शा श्रीअरविंद आश्रम

भारत को जगत् का आध्यात्मिक नेता होना ही चाहिये । अन्दर तो उसमें क्षमता है, परन्तु बाहर… अभी तो सचमुच जगत् का आध्यात्मिक नेता बनने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है।अभी ऐसा अद्भुत अवसर है ! पर…

 

हे भारत, ज्योति और आध्यात्मिक ज्ञान के देश !  संसार में अपने सच्चे लक्ष्य के प्रति जागो, ऐक्य और सामञ्जस्य की राह दिखलाओ।

 

भारत आधुनिक मानवजाति की सभी कठिनाइयों की प्रतीकात्मक प्रस्तुति बन गया है।
भारत ही उसके पुनरुत्थान का, एक उच्चतर और सत्यतर जीवन में पुनरुत्थान का देश होगा।

 

सारी सृष्टि में धरती का एक प्रतिष्ठित विशेष स्थान है, क्योंकि अन्य सभी ग्रहों से भिन्न, वह विकसनशील है और उसके केन्द्र में एक चैत्य सत्ता है। उसमें भी, विशेष रूप से भारत, भगवान् द्वारा चुना हुआ एक
विशेष देश है।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

भारत सबसे आगे का देश है

श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भारत जगत में सबसे आगे का देश है। आध्यात्मिक उदाहरण प्रस्तुत करना ही उसका मिशन है। श्रीअरविंद जगत को यही सिखाने के लिए धरती पर आये थे।

यह तथ्य इतना स्पष्ट है कि यहाँ का एक भोला और अज्ञानी कृषक भी, अपने हृदय में, यूरोप के बुद्धिजीवियों की अपेक्षा भगवान के कही अधिक निकट है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)

भारत की ज़रूरत

श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ

भारत को, विशेष रूप से अभी इस क्षण, जिसकी ज़रूरत है वह है आक्रामक सदगुण, ऊँचे आदर्शवाद की भावना, साहसपूर्ण सृजनशीलता, निर्भीक प्रतिरोध, हिम्मत के साथ आक्रमण। निष्क्रिय तामसिक भावना तो हमारे पास पहले से ही अत्यधिक है।

संदर्भ : श्रीअरविंद (खण्ड-६)

भारत का भविष्य

श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ

भारत का भविष्य बहुत स्पष्ट है। भारत संसार का गुरु है। संसार की भावी रचना भारत पर निर्भर है। भारत जीवित-जाग्रत आत्मा है। भारत संसार में आध्यात्मिक ज्ञान को जन्म दे रहा है। भारत सरकार को चाहिये कि इस क्षेत्र में भारत के महत्व को स्वीकार करे और अपने कार्यों की योजना उसी के अनुसार बनाये ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)

देश की कठिनाई

सूरत कांग्रेस का सत्र, श्रीअरविंद संग वल्लभ भाई पटेल

देश को कठिनाई से उबारने के लिए क्या करना चाहिये?

श्रीअरविंद ने सभी मुश्किलों को पहले से ही देख लिया था और उन्होंने समाधान दे दिया है। हम उनकी शताब्दी के क़रीब पहुँच रहे हैं; ऐसा लगता है मानों सब कुछ पहले से व्यवस्थित हो, समझ रहे हो, मानों, भागवत रूप से व्यवस्थित हो, क्योंकि यह सारे देश में उनकी शिक्षा को फैलाने का एक विलक्षण सुअवसर होगा : उनकी शिक्षा को, व्यावहारिक शिक्षा को, भारत के बारें में उनकी शिक्षा को, भारत को किस तरह संगठित किया जाये, भारत के मिशन को . . . उनकी शिक्षा को सारे देश में कैसे फैलाया जा सकता है – ताकि उनके विचार फैलें ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग -३)

जगद-गुरु

दर्शन संदेश १५ अगस्त २०१८ (२/४)

. . . किसी एक ही रचना पर जोर देने से वह कठोरता आ जाती है जो भूतकाल में भारतीय समाज और उसकी सभ्यता पर छा गयी थी और जिसने उसकी आत्मा का ह्वास कर उसे बन्दी बना दिया था। जब भारत के अंदर अनेकता थी, लेकिन सबमें आत्मा एक थी तब वह सबसे अधिक बलशाली और सबसे अधिक जीवन्त था। -अलीपुर जेल में मुझे इसी का पूर्वदर्शन हुआ था, आज भी मेरा यही मानना है कि भविष्य में भी भारत जब ‘स्व-रूप’ पा लेगा तब वह जगद-गुरु बन जायेगा।

संदर्भ : श्रीअरविंद (खण्ड – ३६)

श्रीमाँ के संदेश

श्रीमती इन्दिरा गांधी श्रीमाँ के साथ

(भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी के श्रीअरविंद आश्रम आने पर माताजी ने उन्हें यह संदेश दिये थे। )

भारत भविष्य के लिए काम करे और सबका नेतृत्व करे। इस तरह वह जगत में अपना सच्चा स्थान फिर से पा लेगा।

बहुत पहले से यह आदत चली आयी है कि विभाजन और विरोध के द्वारा शासन किया जाये। अब एकता, परस्पर समझौते और सहयोग के द्वारा काम करने का समय आ गया है ।

सहयोगी चुनने के लिए, वह जिस दल का है उसकी अपेक्षा मनुष्य का मूल्य ज्यादा महत्वपूर्ण है।

राष्ट्र की महानता अमुक दल की विजय पर नहीं बल्कि सभी दलों की एकता पर निर्भर करती है ।

 

संदर्भ :  माताजी के वचन (भाग-१)

भारत का मिशन

अखंड भारत का नक्शा श्रीअरविंद आश्रम

मैं अधिक-से-अधिक स्पष्ट रूप से यह देख रहा हूँ कि मनुष्य उस निरर्थक घेरे से तब तक बाहर कभी नहीं निकल सकता जिस पर मनुष्यजाति हमेशा चलती रही है, जब तक वह अपने आपको नये आधार पर खड़ा नहीं कर लेता। मुझे यह भी विश्वास है कि विश्व के लिए इस महान विजय को प्राप्त करना भारत का ‘मिशन’ है।

संदर्भ : श्रीअरविंद ( खण्ड-३६)

भारत की भूमिका

अखंड भारत का नक्शा श्रीअरविंद आश्रम

वर्तमान राजनीति में भारत को क्या कोई विशेष भूमिका निभानी है ?

… भारत को जगत में एक भूमिका निभानी है। लेकिन यह आदर्श की बात है और यह बात ऐसे परिवर्तन की मांग करती है जो … बहरहाल, जहां तक मैं जानती हूँ, वह परिवर्तन अभी तक नहीं हुआ है। अगर वह सच्चा और निष्कपट होता तो ऊपरी, बाहरी दृष्टिकोण से भारत अपनी भूमिका निभा सकता।

संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५५

भारत की हर समस्या का समाधान

श्रीअरविंद अपने कक्ष में

देश को कठिनाई से उबारने के लिए क्या करना चाहिये?

श्रीअरविंद ने सभी मुश्किलों को पहले ही देख लिया था और उनका समाधान दे दिया है । हम उनकी शताब्दी के निकट पहुँच रहे हैं; ऐसा लगता है मानों सब कुछ पहले से व्यवस्थित हो, समझ रहे हो , मानों, भागवत रूप से व्यवस्थित हो, क्योंकि यह सारे देश में उनको शिक्षा को फैलाने का एक विलक्षण सुअवसर  होगा : उनकी शिक्षा को, व्यवहारिक शिक्षा को , भारत के बारें में उनकी शिक्षा को, भारत को किस तरह संघठित किया जाएं भारत के ‘मिशन’ को … उनकी शिक्षा को सारे देश में फैलाया जा सकता हैं – ताकि उनके विचार फैले।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-३)