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गीता प्रबंध

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श्रद्धा के नेत्र
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श्रद्धा के नेत्र

by श्रीअरविंद 1 महीना ago1 महीना ago
भगवान के दो रूप
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भगवान के दो रूप

by श्रीअरविंद 3 महीना ago3 महीना ago
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    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    जब मनुष्य अपने-आपको जान लेगा

    …. मनुष्य का कर्म एक ऐसी चीज़ है जो कठिनाइयों और परेशानियों से भरी हुई है, यह एक ऐसे बीहड़ वन के समान गहन और...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 7 महीना ago7 महीना ago
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    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    साधना में प्रगति

    अगर तुम्हारी श्रद्धा दिनादिन दृढ़तर होती जा रही है तो निस्सन्देह तुम अपनी साधना में प्रगति कर रहे हो . . . संदर्भ  : गीता...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 8 महीना ago8 महीना ago
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    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    श्रद्धा के साथ

    “श्रद्धा के साथ जो कोई भक्त मेरे जिस किसी रूप को पूजन चाहता है, मैं उसकी वही श्रद्धा उसमें अचल-अटल बना देता हूँ ।” वह...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 11 महीना ago11 महीना ago
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    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    मंदिर में प्रवेश

    हम सब के अन्दर समरूप से जो भागवत उपस्थिती है वह कोई अन्य प्राथमिक मांग नहीं करती यदि एक  बार इस प्रकार से श्रद्धा और...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 1 वर्ष ago1 वर्ष ago
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    महर्षि श्रीअरविंद घोष
    श्रीअरविंद के वचन

    मेरा रूप

    “श्रद्धा के साथ जो कोई भक्त मेरे जिस किसी रूप को पूजना चाहता है, मैं उसकी वही श्रद्धा उसमें अचल-अटल बना देता हूँ। ” वह...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद के पत्र
    श्रीअरविंद के वचन

    अवतार का बाहरी कार्य

    यह जगत जिस संघर्ष की रंगभूमि है गीता उसके दो पहलुओं पर जोर देती है, एक है आन्तरिक संघर्ष, दूसरा बाह्य युद्ध। आन्तरिक संघर्ष में...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 3 वर्ष ago3 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद के पत्र
    श्रीअरविंद के वचन

    खुद को जानना

    … मनुष्य का कर्म एक ऐसी चीज़ है जो कठिनाइयों और परेशानियों से भरी हुई है, यह एक ऐसे बीहड़ वन के समान गहन और...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 3 वर्ष ago3 वर्ष ago
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    प्रभु श्रीअरविंद
    श्रीअरविंद के वचन

    अवतार के आने का आन्तरिक फल

    भगवान् के अवतार के आने का आन्तरिक फल उन लोगों को प्राप्त होता है जो भगवान् की इस क्रिया से दिव्य जन्म और दिव्य कर्मों...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 6 वर्ष ago6 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    वासुदेवः सर्वम् इति

    वासुदेवः सर्वम् इति का यही अर्थ है कि यह सारा जगत् भगवान् है, इस जगत् में जो कुछ है और इस जगत् से अधिक भी...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 6 वर्ष ago6 वर्ष ago

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    सत्य की शक्ति

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    वर्षों का भार

    वर्षों का भार

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    सच्ची पराजय

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    कुछ भी असंभव नहीं

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    माताजी की ओर खुलना

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  • महर्षि श्रीअरविंद अपने कक्ष में
    विनम्रता

    विनम्रता

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    विनम्र बनने का गलत तरीका

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    आध्यात्मिक जीवन की बाधा

    आध्यात्मिक जीवन की बाधा

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    मैं तुम्हारे साथ हूं

    मैं तुम्हारे साथ हूं

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सतत ‘उपस्थिती’

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  • महाप्रभु श्रीअरविंद घोष
    आत्मा का अनुगमन

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    पूंजीवाद

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  • स्थायी अचंचलता

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    शांति मंत्र

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    घर और काम में साधना

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    अपात्रता का भाव

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    दो चीज़ें

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ
    कभी मत बुड़बुड़ाओ

    कभी मत बुड़बुड़ाओ

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