प्रार्थना


श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ

मेरी अभिप्सा तेरी ओर उठ रही है, अपने रूप में सदा वैसी ही बचकानी, अपनी सरलता में अतिसामान्य, लेकिन मेरी पुकार अधिकाधिक तीव्र है और मेरे लड़खड़ाते शब्दों के पीछे मेरी एकाग्र इच्छा का सारा उत्साह है। …

संदर्भ : प्रार्थना और ध्यान 


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