स्वागत

भागवत कृपा मौजूद है – अपने द्वार खोलो और उसका स्वागत करो।

मेरे प्रेम और आशीर्वाद सहित ।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

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