सच्ची नम्रता

सच्ची नम्रता यह जानने में है कि केवल परम चेतना, परम इच्छा का ही अस्तित्व है और “मैं” का अस्तित्व नहीं है

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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