माँ की वाणी सुनने की तैयारी

यह कब कहा जा सकता है कि व्यक्ति आन्तरिक रूप से माँ की वाणी सुनने को तैयार है ?

जब व्यक्ति के अंदर समता, विवेक और पर्याप्त यौगिक अनुभूति हो – अन्यथा वह किसी भी आवाज को माँ की वाणी मानने की भूल कर सकता है ।

संदर्भ : माताजी के विषय में 

प्रातिक्रिया दे