तुम्हारा लक्ष्य

भगवान ने तुम्हें इसलिए अपना नहीं बनाया है कि तुम मनुष्यों की प्रशंसाओं को एकत्र करो, बल्कि इसलिये बनाया है कि निर्भय होकर उनके आदेश का पालन करो।

संदर्भ : विचारमाला और सूत्रावली

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