हमारा लक्ष्य

हमारा लक्ष्य है अपनी सत्ता की पूर्णता को चरितार्थ करना और मानव पशु को भागवत मनुष्य में बदल देना ।

मेरे आशीर्वाद सहित ।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१७)

 

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