भागवत कृपा की प्राप्ति

भागवत कृपा हमेशा रहती है, शाश्वत रूप से उपस्थित और सक्रिय; लेकिन श्रीअरविंद कहते हैं कि हमारे लिए उसे ग्रहण करने, बनाये रखने और वह जो देती है उसका उपयोग करने की स्थिति में रहना बहुत कठिन हैं ।

श्रीअरविंद तो यहाँ तक कहते है कि अमर देवों के प्याले से पीने की अपेक्षा यह ज़्यादा कठिन हैं ।

भागवत कृपा पाने के लिए तुम्हारे अन्दर प्रबल अभीप्सा ही नहीं , सच्ची निष्कपट नम्रता और सम्पूर्ण विश्वास भी होना चाहिये।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

प्रातिक्रिया दे