व्यक्तिगत जीवन का प्रयोजन

व्यक्तिगत जीवन का प्रयोजन है भगवान को खोजने और उनके साथ एक होने का आनन्द । जब तुम यह बात समझ लो तो तुम सभी कठिनाइयों को पार करने की शक्ति पाने के लिए तैयार होते हो ।

संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१६)

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