केवल एक सहारा

भगवान के सिवा कभी किसी दूसरे मनुष्य या दूसरी वस्तु पर, वह चाहे जो हो निर्भर नहीं करना। कारण, यदि तुम किसी व्यक्ति का सहारा लेने झुकोगे तो वह सहारा टूट जाएगा । तुम इस विषय में निस्संदिग्ध हो सकते हो ।

संदर्भ : प्रश्न और उत्तर (१९५०-१९५१)

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