ऊपर की ओर

मैं हमेशा ऊपर की ओर देखती हूँ । ‘सौन्दर्य’, ‘शांति’ ,’प्रकाश’ वहाँ मौजूद हैं, वे नीचे आने के लिए तैयार हैं। अतः हमेशा अभीप्सा करो और उन्हें इस धरती पर अभिव्यक्त करने के लिए ऊपर देखो।

दुनिया की कुरूप चीजों की ओर नीचे न देखो। तुम जब कभी दु:खी होओ, तो हमेशा मेरे साथ ऊपर देखो।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)

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