दो चीज़ें

ये दो चीज़ें एकदम अनिवार्य है : सहनशक्ति और एक ऐसी श्रद्धा जिसे कोई भी चीज डिगा न सके, संपूर्ण प्रतीत होने वाला निषेध भी नहीं, चाहे तुम्हें बहुत सहना पड़े, चाहे तुम दयनीय दशा में क्यों न होओ ( मेरा मतलब है शारीरिक दृष्टि), चाहे तुम थक जाओ, फिर भी टीके रहो, चिपके रहो और टीके रहो — सहनशक्ति होनी चाहिये …।

संदर्भ : पथ पर 

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