दुःख और कष्ट का मूल

 अप्रिय विचार अप्रिय भावनाएं लाते हैं-अप्रिय भावनाएं तुम्हें भगवान् से दूर ले जाती हैं और तुम्हें उस शैतान के हाथों में निःशस्त्र फेंक देती हैं जो तुम्हें केवल हड़प लेना चाहता है-और यही अनन्त दुःख और कष्ट का मूल है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२) 

प्रातिक्रिया दे