भागवत कृपा

 ‘भागवत कृपा’ कार्य करने के लिए हमेशा मौजूद है लेकिन तुम्हें उसे कार्य करने देना चाहिये, उसकी क्रिया का प्रतिरोध नहीं करना चाहिये । एकमात्र आवश्यक शर्त है श्रद्धा । जब तुम्हें लगे कि आक्रमण हो रहा है तो सहायता के लिए श्रीअरविन्द को और मुझे पुकारो । अगर तुम्हारी पुकार सच्ची है (यानी, अगर तुम सचमुच स्वस्थ होना चाहते हो) तो पुकार को उत्तर मिलेगा ओर ‘भागवत कृपा’ तुम्हें स्वस्थ बना देगी ।

 सन्दर्भ : माताजी के वचन ( भाग-२ ) 

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