​सच्ची आध्यात्मिकता

सच्ची आध्यात्मिकता जीवन से संन्यास नहीं है, बल्कि ‘दिव्य पूर्णता’ के साथ जीवन को पूर्ण बनाना हैं ।

 सन्दर्भ : माताजी के वचन ( भाग – १ )

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