आराम करना

जिस क्षण तुम संतुष्ट हो जाओ और अभीप्सा करना छोड़ दो, उसी क्षण से तुम मरना शुरू कर देते हो । जीवन गति है, जीवन प्रयास है । यह आगे ही आगे की और कूच है, भावी उद्घाटनों और सिद्धियों की ओर आरोहण है । आराम करना चाहने से भयंकर और कुछ नहीं है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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