आन्तरिक तथा बाह्य संपर्क

श्रीमाँ के साथ आन्तरिक संपर्क बढ़े – जब तक वह न होगा, बाहरी संपर्को की बहुलता के द्वारा आसानी से अपने जीवन के उसी समान ढर्रे पर चलते रहोगे।

संदर्भ : माताजी के विषय में 

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