श्रीअरविंद की महासमाधि – श्रीमाँ (२)

शोक करना श्रीअरविंद का अपमान है, वे हमारे साथ सचेतन और जीवित रूप में विध्यमान है ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)

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