पूर्ण जीवन की और

यदि मनुष्य जीवन को कम गंभीरतापूर्वक लें तो वे बहुत शीघ्र उसे अधिक पूर्ण बना सकेंगे । भगवान् कभी अपने कार्य को गम्भीरतापूर्वक नहीं लेतें; इसलिए हम इस अद्भुत विश्व को देख रहे हैं।

सन्दर्भ : विचारमाला और सूत्रावली 

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