प्रगतिशील बनों

कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती ।

सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के अधिक निकट आना ।

हर गुजरता हुआ वर्ष पूर्णता की ओर नयी प्रगति की पहचान होना चाहिये ।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग – ३)

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